सुबह का नाश्ताकचौड़ी-सब्ज़ी और जलेबी
बनारस का असली नाश्ता: ख़स्ता कचौड़ी, आलू की तीखी सब्ज़ी, और ऊपर से गरम जलेबी।
काशी
वाराणसी, जिसे बनारस और काशी भी कहते हैं, उत्तर प्रदेश में पवित्र गंगा के किनारे बसा दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है। यहाँ काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, 100 से ज़्यादा घाट, शाम की प्रसिद्ध गंगा आरती और अस्सी घाट का शांत सुबह-ए-बनारस है।
बनारस दर्शन में आपकी यात्रा की योजना के लिए ज़रूरी सब कुछ है: मंदिरों का समय, घूमने की जगहें, बनारसी खान-पान, बनारसी साड़ी की ख़रीदारी और काम की यात्रा टिप्स, हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में।
कहाँ घूमें
मंदिर12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से गंगा घाट तक सीधा और चौड़ा रास्ता है।
घाटशाम की गंगा आरती के लिए सबसे मशहूर घाट। आरती से काफ़ी पहले पहुँचकर जगह ले लीजिए।
घाटसुबह-ए-बनारस, योग और कुल्हड़ वाली चाय। शहर की सबसे शांत सुबह यहीं मिलती है।
घाटकाशी का महाश्मशान। यहाँ फ़ोटो लेने से बचिए और सम्मान बनाए रखिए।
मंदिरहनुमान जी का प्राचीन मंदिर, तुलसीदास जी से जुड़ा हुआ। मंगलवार और शनिवार को भीड़ ज़्यादा होती है।
मंदिरकाशी के कोतवाल। मान्यता है कि बनारस यात्रा इनके दर्शन के बिना अधूरी है।
हर सुबह अस्सी घाट पर
'शाम-ए-अवध और सुबह-ए-बनारस' पूरे भारत में मशहूर हैं। 2014 से सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम हर सूर्योदय का स्वागत अस्सी घाट पर पूजा, संगीत और योग से करता है, और ये सबके लिए फ़्री है।
गर्मी में लगभग सुबह 5 बजे और सर्दी में 6 बजे शुरू। अच्छी जगह के लिए 15 मिनट पहले पहुँचें।
सूर्योदय आरती
ख़ास गाइड
आरती के समय से लेकर ऑनलाइन बुकिंग तक, आसान और शांत दर्शन के लिए ज़रूरी हर जानकारी।
क्या खाएँ
बनारस में खाना भी समय देखकर खाया जाता है। सुबह कचौड़ी, शाम को चाट, और सर्दी हो तो मलइयो।
सुबह का नाश्ताबनारस का असली नाश्ता: ख़स्ता कचौड़ी, आलू की तीखी सब्ज़ी, और ऊपर से गरम जलेबी।
शाम कोकुल्हड़ में मसालेदार, खट्टी-मीठी चाट। बनारस के बाहर इसका असली स्वाद मिलना मुश्किल है।
सिर्फ़ सर्दी मेंदूध का झाग जो रात भर ओस में जमता है। हल्का, केसरिया और मुँह में घुल जाने वाला।
दिन में कभी भीगाढ़ी लस्सी, ऊपर मलाई की मोटी परत। गर्मी में घाट घूमने के बाद इससे बेहतर कुछ नहीं।
ख़रीदारी
हाथ से बुनी बनारसी सिल्क, ब्रोकेड, पीतल की पूजा सामग्री और रुद्राक्ष: शहर की बेहतरीन कलाएँ और वो कहाँ मिलती हैं।
यात्रा टिप्स
नाव में बैठने से पहले ही घाटों की संख्या और किराया साफ़ कर लीजिए, बाद में बहस से बचेंगे।
पुराने बनारस की गलियों में Google Maps अक्सर उलझ जाता है। दुकान वालों से पूछना ज़्यादा तेज़ है।
घाट पर ज़बरदस्ती तिलक लगाकर या 'VIP दर्शन' के नाम पर पैसे माँगने वालों को विनम्रता से मना कर दीजिए।