देव दीपावली पर दीयों से जगमगाते वाराणसी के घाट

त्योहार

देव दीपावली 2026 वाराणसी: तारीख़, सबसे अच्छे घाट, नाव और यात्रा टिप्स

देव दीपावली, यानी कार्तिक पूर्णिमा की रात, बनारस का हर घाट लाखों दीयों से सज जाता है और पूरा गंगा किनारा एक छोर से दूसरे छोर तक जगमगा उठता है। 2026 में ये मंगलवार, 24 नवंबर को है। इस गाइड में तारीख़, सबसे अच्छे घाट, नाव कैसे मिलेगी, भीड़ और ट्रैफ़िक के नियम, और पूरे दिन का प्लान, सब कुछ है।

एक नज़र में

तारीख़मंगलवार, 24 नवंबर 2026
दीये जलते हैंसूर्यास्त से (~शाम 5:15)
सबसे अच्छा नज़ारानाव से
प्रवेशघाटों पर फ़्री
होटल बुकिंगजितनी जल्दी हो सके
इस गाइड में

देव दीपावली 2026 की तारीख़ और समय

देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, दिवाली के 15 दिन बाद। ज़्यादातर पंचांगों के हिसाब से 2026 में ये मंगलवार, 24 नवंबर को है। दीये शाम ढलते ही जलाए जाते हैं, और लगभग शाम 5:30 से रात 8:30 बजे तक घाट सबसे सुंदर दिखते हैं।

पूर्णिमा तिथि दो दिन में पड़ने की वजह से कुछ कैलेंडर 25 नवंबर भी बताते हैं। यात्रा से एक हफ़्ता पहले काशी का पंचांग या लोकल ख़बरें ज़रूर देख लें।

क्याकब (लगभग)
कार्तिक पूर्णिमा का गंगा स्नानसुबह सूर्योदय से पहले से
घाटों पर दीये जलनासूर्यास्त, लगभग शाम 5:15 – 5:45
दशाश्वमेध घाट की भव्य गंगा आरतीशाम को, दीये जलने के बाद
घाट देखने का सबसे अच्छा समयशाम 5:30 – रात 8:30

देवता काशी में दिवाली क्यों मनाते हैं

मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसीलिए उन्हें त्रिपुरारी भी कहते हैं। इस जीत की ख़ुशी में देवता काशी उतरे और गंगा किनारे दीये जलाए। तभी से बनारस इसे देवताओं की दिवाली के रूप में मनाता है।

देव दीपावली देखने के लिए सबसे अच्छे घाट

  • दशाश्वमेध घाट: रात की सबसे भव्य गंगा आरती यहीं होती है, और भीड़ भी सबसे ज़्यादा यहीं रहती है। बैठने की जगह चाहिए तो दोपहर 3 बजे तक पहुँच जाइए।
  • अस्सी घाट: थोड़ा शांत, लोकल और त्योहार वाला माहौल। नाव की सैर यहीं से शुरू करना अच्छा रहता है।
  • नमो घाट और राज घाट: उत्तरी छोर पर खुली जगह, जहाँ गंगा में दीयों की परछाईं बहुत सुंदर लगती है।
  • चेत सिंह, दरभंगा और केदार घाट: दीयों और सजावट वाली सबसे ज़्यादा फ़ोटो इन्हीं घाटों की ली जाती हैं।
  • गंगा का दूसरा किनारा (रेत वाला हिस्सा): यहाँ से जगमगाते घाटों का पूरा अर्धचंद्र एक साथ दिखता है।

नाव से देव दीपावली देखना

देव दीपावली का सबसे अच्छा नज़ारा गंगा से दिखता है, जहाँ एक साथ कई किलोमीटर तक दीये नज़र आते हैं। इस रात नाव का किराया कई गुना बढ़ जाता है, और अच्छी नावें कई दिन पहले ही बुक हो जाती हैं।

होटल या किसी भरोसेमंद नाविक से कुछ दिन पहले ही बुकिंग कर लीजिए। पैसे देने से पहले किराया, रास्ता (जैसे अस्सी से राज घाट और वापस), समय और कितने लोग बैठेंगे, ये सब तय कर लीजिए। भीड़ में छोटी चप्पू वाली नाव से बड़ी मोटर बोट या बजरा ज़्यादा स्थिर और सुरक्षित रहते हैं।

ध्यान दें: नाव पर हर व्यक्ति के लिए लाइफ़ जैकेट ज़रूर हो, और ओवरलोड नाव में न बैठें, चाहे किराया कितना भी कम क्यों न हो।

देव दीपावली के दिन का प्लान

  1. 1
    सुबह जल्दी: कार्तिक पूर्णिमा स्नान

    सूर्योदय पर गंगा स्नान कीजिए, या अस्सी या दशाश्वमेध की सीढ़ियों से ये नज़ारा देखिए।

  2. 2
    दोपहर से पहले: दर्शन

    काशी विश्वनाथ के दर्शन जल्दी कर लीजिए, दिन चढ़ने के साथ लाइन लंबी होती जाती है।

  3. 3
    दोपहर: अपनी जगह पर पहुँचिए

    घाट की तरफ़ जाने वाली सड़कें दोपहर से बंद होने लगती हैं, इसलिए 3–4 बजे तक अपने घाट या नाव वाली जगह पर पहुँच जाइए।

  4. 4
    शाम: दीये और आरती

    सूर्यास्त पर दीये जलते देखिए, फिर दशाश्वमेध की गंगा आरती, सीढ़ियों से या नाव से।

  5. 5
    रात: आराम से वापसी

    भीड़ कम होने पर घाटों के किनारे टहलिए, और पुराने शहर से पैदल ही निकलिए; ऑटो मिलना मुश्किल होता है।

भीड़, ट्रैफ़िक और सुरक्षा

इस एक शाम लाखों लोग घाटों पर आते हैं। पुलिस आम तौर पर दोपहर से घाटों की तरफ़ गाड़ियाँ रोक देती है, इसलिए 1–3 किलोमीटर पैदल चलने के लिए तैयार रहिए। गोदौलिया और दशाश्वमेध के पास की गलियों में बहुत ज़्यादा भीड़ होती है।

साथ रखें

  • आरामदायक जूते
  • हल्की शॉल, नवंबर की शाम गंगा किनारे ठंडी हो जाती है
  • पानी और थोड़ा नाश्ता
  • चार्ज फ़ोन और पावर बैंक
  • होटल का नाम और पता फ़ोन में ऑफ़लाइन सेव

मना है

  • भारी बैग या क़ीमती सामान
  • आरती के समय आगे जाने के लिए धक्का-मुक्की
  • छोटे बच्चों का हाथ छोड़ना
  • ओवरलोड नाव में बैठना

कहाँ रुकें और कब बुक करें

घाट के पास के होटल देव दीपावली से कई हफ़्ते पहले भर जाते हैं, और इन दिनों किराया आम दिनों से काफ़ी ज़्यादा होता है। तारीख़ तय होते ही बुकिंग कर लीजिए।

अस्सी, शिवाला या दशाश्वमेध के पास रुकेंगे तो घाट तक पैदल जा सकेंगे। वहाँ जगह न मिले तो लंका, BHU और सिगरा भी ठीक हैं; बस आख़िरी हिस्सा पैदल चलने का प्लान रखिए।

सलाह: एक दिन पहले (23 नवंबर) पहुँच जाएँ तो घाटों की सजावट होते भी देख लेंगे और सबसे ज़्यादा ट्रैफ़िक से भी बच जाएँगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में वाराणसी में देव दीपावली कब है?

ज़्यादातर पंचांगों के हिसाब से देव दीपावली 2026 कार्तिक पूर्णिमा, मंगलवार 24 नवंबर 2026 को है। यात्रा से एक हफ़्ता पहले लोकल पंचांग से पक्का कर लें।

देव दीपावली देखने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सूर्यास्त से लगभग रात 8:30 बजे तक, जब सारे दीये जल चुके होते हैं और गंगा आरती होती है। घाटों पर दोपहर 3–4 बजे तक पहुँच जाइए।

क्या देव दीपावली देखने का कोई टिकट है?

नहीं। घाटों से देखना बिल्कुल फ़्री है। पैसे सिर्फ़ नाव के लगते हैं, और इस रात नाव का किराया आम दिनों से काफ़ी ज़्यादा होता है।

देव दीपावली और दिवाली में क्या फ़र्क़ है?

दिवाली कार्तिक अमावस्या (2026 में 8 नवंबर) को पूरे देश में घरों में मनाई जाती है। देव दीपावली उसके 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को आती है और ख़ास तौर पर काशी के घाटों पर, देवताओं की दिवाली के रूप में मनाई जाती है।