मणिकर्णिका घाट

घाटदशाश्वमेध और सिंधिया घाट के बीच

मणिकर्णिका घाट

काशी का महाश्मशान। यहाँ फ़ोटो लेने से बचिए और सम्मान बनाए रखिए।

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परिचय

मणिकर्णिका हिंदू धर्म का सबसे पवित्र श्मशान घाट है। मान्यता है कि यहाँ अंतिम संस्कार होने से मोक्ष मिलता है, इसलिए पूरे भारत से लोग अपने परिजनों को यहाँ लाते हैं। कहते हैं यहाँ की आग कभी नहीं बुझती।

कथा है कि माता पार्वती का कर्णफूल (मणिकर्णिका) यहाँ गिरा था, इसी से घाट का नाम पड़ा। भगवान विष्णु द्वारा खोदा गया माना जाने वाला मणिकर्णिका कुंड शहर के सबसे पुराने पवित्र स्थलों में से है।

यहाँ आना एक ऐसा अनुभव है जो जीवन और मृत्यु के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। पर्यटक नहीं, एक शांत दर्शक बनकर आइए।

ज़रूर देखें

  • मणिकर्णिका कुंड
  • नदी से नाव पर बैठकर दृश्य
  • पास में रत्नेश्वर महादेव (झुका हुआ मंदिर)

यात्रा टिप्स

  • अंतिम संस्कार की फ़ोटो या वीडियो न लें।
  • 'लकड़ी के लिए दान' माँगने या पैसे लेकर घुमाने वालों से सावधान रहें, विनम्रता से मना कर दें।
  • सादे कपड़े पहनें और धीमे बोलें।

लोकेशन

दशाश्वमेध और सिंधिया घाट के बीच

आसपास की जगहें

काशी विश्वनाथ मंदिरमंदिर

काशी विश्वनाथ मंदिर

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से गंगा घाट तक सीधा और चौड़ा रास्ता है।

  • समय: लगभग सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक (मंगला आरती से शुरू)
  • प्रवेश: सामान्य दर्शन फ़्री; सुगम दर्शन और आरती के लिए टिकट
सबसे अच्छा समय: सुबहपूरी जानकारी
दशाश्वमेध घाटघाट

दशाश्वमेध घाट

शाम की गंगा आरती के लिए सबसे मशहूर घाट। आरती से काफ़ी पहले पहुँचकर जगह ले लीजिए।

  • समय: पूरे दिन खुला; गंगा आरती सर्दी (अक्टूबर–मार्च) में लगभग शाम 6 बजे और गर्मी में 6:45 बजे, लगभग 45 मिनट
  • प्रवेश: फ़्री (नाव का किराया अलग)
सबसे अच्छा समय: शामपूरी जानकारी
काल भैरव मंदिरमंदिर

काल भैरव मंदिर

काशी के कोतवाल। मान्यता है कि बनारस यात्रा इनके दर्शन के बिना अधूरी है।

  • समय: लगभग सुबह 5 से दोपहर 1:30 और शाम 4:30 से रात 9:30
  • प्रवेश: फ़्री
सबसे अच्छा समय: सुबहपूरी जानकारी