मंदिरभैरोनाथ, मैदागिन के पास
काल भैरव मंदिर
काशी के कोतवाल। मान्यता है कि बनारस यात्रा इनके दर्शन के बिना अधूरी है।
परिचय

काल भैरव भगवान शिव का उग्र रूप हैं और काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इनकी अनुमति के बिना कोई काशी में नहीं रह सकता, इसलिए कई यात्री सबसे पहले या आख़िर में यहाँ 'हाज़िरी' लगाने आते हैं।
छोटा और भीड़ वाला ये मंदिर पुराने शहर की गलियों में है। चाँदी के मुख वाली प्रतिमा फूलों से सजी रहती है, और इनका वाहन श्वान (कुत्ता) है, इसलिए आसपास अक्सर लोग कुत्तों को खाना खिलाते दिखते हैं।
श्रद्धालु रक्षा के लिए मंदिर का काला धागा कलाई पर बाँधते हैं। रविवार, मंगलवार और भैरव अष्टमी को सबसे ज़्यादा भीड़ होती है।
ज़रूर देखें
- काशी के कोतवाल के दर्शन
- रक्षा का काला धागा
- मैदागिन के आसपास पुराने शहर की गलियाँ
यात्रा टिप्स
- लंबी लाइन से बचने के लिए आम दिनों में सुबह जल्दी जाएँ।
- मोबाइल संभालकर रखें; गली तंग है और भीड़ बहुत रहती है।
- उसी सुबह काशी विश्वनाथ के दर्शन भी कर लें।
लोकेशन
भैरोनाथ, मैदागिन के पास
आसपास की जगहें
मंदिरकाशी विश्वनाथ मंदिर
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से गंगा घाट तक सीधा और चौड़ा रास्ता है।
- समय: लगभग सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक (मंगला आरती से शुरू)
- प्रवेश: सामान्य दर्शन फ़्री; सुगम दर्शन और आरती के लिए टिकट
घाटमणिकर्णिका घाट
काशी का महाश्मशान। यहाँ फ़ोटो लेने से बचिए और सम्मान बनाए रखिए।
- समय: 24 घंटे खुला
- प्रवेश: फ़्री
इतिहाससारनाथ
जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया। धमेख स्तूप और म्यूज़ियम के लिए आधा दिन रखिए।
- समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक; म्यूज़ियम शुक्रवार को बंद
- प्रवेश: स्तूप परिसर का ASI टिकट: भारतीयों के लिए लगभग ₹25 और विदेशियों के लिए ₹300 (ऑनलाइन थोड़ा सस्ता); 15 साल से कम बच्चों के लिए फ़्री। म्यूज़ियम का टिकट अलग है