दशाश्वमेध घाट पर शाम की गंगा आरती करते पुजारी

दर्शन

वाराणसी की गंगा आरती: समय, सबसे अच्छा घाट और कैसे देखें

गंगा आरती वाराणसी का सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य है। हर शाम सूरज ढलते ही पुजारी माँ गंगा को दीप, फूल और मंत्र अर्पित करते हैं, और हज़ारों लोग सीढ़ियों और नावों से इसे देखते हैं। इसे अच्छे से देखने के लिए ज़रूरी सारी जानकारी यहाँ है।

एक नज़र में

शाम की आरतीसूर्यास्त के ठीक बाद
अवधिलगभग 45 मिनट
प्रवेशफ़्री
सुबह की आरतीअस्सी घाट, सूर्योदय पर
मुख्य घाटदशाश्वमेध घाट
फ़ोटोअनुमति है (बिना फ़्लैश)
इस गाइड में

गंगा आरती क्या है?

आरती ईश्वर को प्रकाश अर्पित करने की हिंदू परंपरा है। वाराणसी में ये आरती गंगा को अर्पित होती है, जिन्हें देवी और माँ के रूप में पूजा जाता है। केसरिया वस्त्रों में युवा पुजारी नदी की ओर मुख करके लकड़ी के चबूतरों पर खड़े होते हैं और शंख, घंटों और संस्कृत मंत्रों के बीच एक साथ बड़े पीतल के दीपक घुमाते हैं।

ये आरती साल के हर दिन होती है, और इसे देखना सबके लिए फ़्री है।

गंगा आरती का समय

शाम की आरती सूर्यास्त के ठीक बाद शुरू होती है, इसलिए समय साल भर बदलता रहता है। अस्सी घाट पर सुबह की आरती सूर्योदय से पहले सुबह-ए-बनारस के साथ शुरू होती है।

मौसमशाम की आरती (लगभग)अस्सी पर सुबह की आरती (लगभग)
गर्मी (अप्रैल – सितंबर)शाम 6:45 – 7:15सुबह 5:00
सर्दी (अक्टूबर – मार्च)शाम 6:00 – 6:30सुबह 6:00

ध्यान दें: ये समय लगभग हैं और सूर्यास्त-सूर्योदय के साथ बदलते हैं। मानसून में बाढ़ के समय आरती अक्सर ऊपर की सीढ़ियों या छतों पर होती है।

कहाँ देखें: दशाश्वमेध या अस्सी?

घाटकिसके लिए अच्छाभीड़
दशाश्वमेध घाटसात पुजारियों वाली सबसे भव्य शाम की आरतीबहुत ज़्यादा
राजेंद्र प्रसाद घाटउसी आरती का साफ़ बगल से नज़ारामध्यम
अस्सी घाटछोटी शाम की आरती और सूर्योदय का सुबह-ए-बनारसकम से मध्यम

नाव से आरती देखना

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    नाव पहले से लें

    सूर्यास्त से लगभग एक घंटा पहले दशाश्वमेध या पास के घाट पर जाएँ और किराया व समय पहले तय करें।

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    चप्पू वाली नाव या मोटरबोट चुनें

    चप्पू वाली नाव ज़्यादा शांत होती है; रास्ते में घाट भी देखने हों तो मोटरबोट तेज़ है।

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    छोटी घाट यात्रा करें

    कई नाविक पहले मणिकर्णिका और आसपास के घाट दिखाते हैं, फिर दशाश्वमेध के सामने नाव रोकते हैं।

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    नदी से आरती देखें

    नावें चबूतरों के सामने कतार में खड़ी होती हैं, जिससे पूरी आरती का साफ़ और बिना भीड़ का नज़ारा मिलता है।

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    दीपदान करें

    फूलों वाला पत्ते का छोटा दीया लेकर प्रार्थना के साथ गंगा में प्रवाहित करें।

सलाह: अकेले हों तो दूसरे यात्रियों के साथ नाव शेयर करें, किराया कम पड़ेगा।

अच्छे अनुभव के लिए सलाह

साथ रखें

  • सीढ़ियों पर जगह के लिए 45–60 मिनट पहले पहुँचें
  • मोबाइल और पर्स आगे की जेब में रखें
  • बैठकर देखें ताकि पीछे वालों को भी दिखे
  • नाव और दीये के लिए थोड़े नक़द पैसे रखें

मना है

  • आरती के दौरान फ़्लैश से फ़ोटो लेना
  • पुजारियों के चबूतरों पर चढ़ना
  • सीढ़ियों पर 'रिज़र्व सीट' के लिए किसी को पैसे देना
  • घाट पर प्लास्टिक या कचरा छोड़ना

दशाश्वमेध घाट कैसे पहुँचें

ऑटो, ई-रिक्शा या कैब से गोदौलिया चौक तक जाएँ, क्योंकि शाम को इससे आगे गाड़ियाँ नहीं जातीं, फिर लगभग 10 मिनट पैदल चलकर घाट पहुँचें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वाराणसी में गंगा आरती कितने बजे होती है?

शाम की गंगा आरती सूर्यास्त के ठीक बाद शुरू होती है, सर्दी में लगभग शाम 6:00–6:30 और गर्मी में 6:45–7:15, और लगभग 45 मिनट चलती है।

क्या गंगा आरती के लिए टिकट लगता है?

नहीं, घाट से गंगा आरती देखना फ़्री है। नाव से देखना चाहें तो सिर्फ़ नाव का किराया लगता है।

गंगा आरती के लिए सबसे अच्छा घाट कौन सा है?

शाम की सबसे भव्य आरती दशाश्वमेध घाट पर होती है। शांत अनुभव के लिए अस्सी घाट पर सुबह की आरती देखें।

क्या गंगा आरती हर दिन होती है?

हाँ, ये साल के हर दिन होती है, मानसून में भी, जब इसे ऊँची जगह पर किया जा सकता है।