
मंदिरविश्वनाथ गली, गोदौलिया के पास
काशी विश्वनाथ मंदिर
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से गंगा घाट तक सीधा और चौड़ा रास्ता है।
परिचय
काशी विश्वनाथ, यानी 'विश्व के नाथ', भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और बनारस का आध्यात्मिक केंद्र हैं। मान्यता है कि यहाँ दर्शन और गंगा स्नान से मोक्ष मिलता है।
वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह के दान किए सोने से इसके शिखर मढ़े गए, इसलिए इसे बनारस का स्वर्ण मंदिर भी कहते हैं।
2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर खुला, जो मंदिर को सीधे ललिता घाट पर गंगा से जोड़ता है। जहाँ पहले तंग गलियों से निकलना पड़ता था, वहाँ अब चौड़ा पत्थर का प्रांगण है और सामने गंगा दिखती है।


ज़रूर देखें
- भोर से पहले मंगला आरती
- सोने से मढ़े शिखर
- गंगा तक जाता काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर
- पास में ज्ञानवापी कूप और नंदी
यात्रा टिप्स
- मोबाइल, कैमरा, बैग और चमड़े का सामान अंदर ले जाना मना है। ऑफ़िशियल लॉकर का उपयोग करें।
- सुगम दर्शन या आरती का टिकट सिर्फ़ मंदिर की ऑफ़िशियल वेबसाइट से बुक करें।
- सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर बहुत भीड़ होती है। आम दिनों में सुबह जल्दी सबसे शांत समय है।
- गेट के बाहर पैसे लेकर 'VIP दर्शन' कराने वालों को अनदेखा करें।
लोकेशन
विश्वनाथ गली, गोदौलिया के पास
आसपास की जगहें
मंदिरअन्नपूर्णा मंदिर
अन्न की देवी माता अन्नपूर्णा का मंदिर, जिनके बारे में मान्यता है कि वो काशी में किसी को भूखा नहीं सोने देतीं।
- समय: लगभग सुबह 4 से रात 11 बजे तक (दोपहर में थोड़ी देर बंद)
- प्रवेश: फ़्री
घाटदशाश्वमेध घाट
शाम की गंगा आरती के लिए सबसे मशहूर घाट। आरती से काफ़ी पहले पहुँचकर जगह ले लीजिए।
- समय: पूरे दिन खुला; गंगा आरती सर्दी (अक्टूबर–मार्च) में लगभग शाम 6 बजे और गर्मी में 6:45 बजे, लगभग 45 मिनट
- प्रवेश: फ़्री (नाव का किराया अलग)
घाटमणिकर्णिका घाट
काशी का महाश्मशान। यहाँ फ़ोटो लेने से बचिए और सम्मान बनाए रखिए।
- समय: 24 घंटे खुला
- प्रवेश: फ़्री