सारनाथ

इतिहासशहर से लगभग 10 किमी उत्तर-पूर्व

सारनाथ

जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया। धमेख स्तूप और म्यूज़ियम के लिए आधा दिन रखिए।

सारी जगहें

परिचय

बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध सारनाथ के मृगदाव (डियर पार्क) आए और पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया। इसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहते हैं, और इसी कारण सारनाथ बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र स्थलों में से एक है।

विशाल धमेख स्तूप, जो लगभग 500 ईस्वी में फिर से बनाया गया, उसी जगह को चिह्नित करता है। आसपास मठों के खंडहर और टूटा हुआ अशोक स्तंभ है। इस स्तंभ के ऊपर लगा प्रसिद्ध सिंह शीर्ष आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न है और सारनाथ म्यूज़ियम में रखा है।

थाईलैंड, जापान, तिब्बत, श्रीलंका और दूसरे देशों के बनाए मठ इसे अंतरराष्ट्रीय रंग देते हैं, और मूलगंध कुटी विहार में बुद्ध के जीवन के सुंदर भित्ति-चित्र हैं।

ज़रूर देखें

  • धमेख स्तूप
  • अशोक स्तंभ के अवशेष
  • सारनाथ म्यूज़ियम में सिंह शीर्ष
  • मूलगंध कुटी विहार
  • डियर पार्क

यात्रा टिप्स

  • म्यूज़ियम देखना है तो शुक्रवार को न जाएँ।
  • सुबह या दोपहर बाद जाएँ; दोपहर में छाँव कम मिलती है।
  • आराम से घूमने के लिए आधे दिन की कैब ले लें।

लोकेशन

शहर से लगभग 10 किमी उत्तर-पूर्व

आसपास की जगहें

काल भैरव मंदिरमंदिर

काल भैरव मंदिर

काशी के कोतवाल। मान्यता है कि बनारस यात्रा इनके दर्शन के बिना अधूरी है।

  • समय: लगभग सुबह 5 से दोपहर 1:30 और शाम 4:30 से रात 9:30
  • प्रवेश: फ़्री
सबसे अच्छा समय: सुबहपूरी जानकारी
काशी विश्वनाथ मंदिरमंदिर

काशी विश्वनाथ मंदिर

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से गंगा घाट तक सीधा और चौड़ा रास्ता है।

  • समय: लगभग सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक (मंगला आरती से शुरू)
  • प्रवेश: सामान्य दर्शन फ़्री; सुगम दर्शन और आरती के लिए टिकट
सबसे अच्छा समय: सुबहपूरी जानकारी
रामनगर क़िलाइतिहास

रामनगर क़िला

गंगा के उस पार काशी नरेश का क़िला, जिसमें पुरानी गाड़ियों और हथियारों का संग्रहालय है।

  • समय: लगभग सुबह 10 से शाम 5 बजे
  • प्रवेश: म्यूज़ियम के लिए छोटा टिकट
सबसे अच्छा समय: दोपहरपूरी जानकारी