
मंदिरविश्वनाथ गली, काशी विश्वनाथ के पास
अन्नपूर्णा मंदिर
अन्न की देवी माता अन्नपूर्णा का मंदिर, जिनके बारे में मान्यता है कि वो काशी में किसी को भूखा नहीं सोने देतीं।
परिचय
माता अन्नपूर्णा अन्न और पोषण की देवी हैं, जो माता पार्वती का ही एक रूप हैं। कथा है कि स्वयं भगवान शिव भिक्षा पात्र लेकर उनके पास आए थे, और माता ने वचन दिया कि काशी में कोई भूखा नहीं रहेगा।
वर्तमान मंदिर 18वीं सदी में मराठा पेशवा बाजीराव ने बनवाया था। ये काशी विश्वनाथ से कुछ ही क़दम की दूरी पर है, इसलिए ज़्यादातर श्रद्धालु दोनों के दर्शन एक साथ करते हैं।
दीपावली के बाद होने वाला अन्नकूट उत्सव यहाँ बहुत प्रसिद्ध है, जब माता को अन्न का पहाड़ भोग लगाया जाता है। धनतेरस के आसपास साल में सिर्फ़ कुछ दिनों के लिए माता की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन होते हैं, जिसके लिए भारी भीड़ उमड़ती है।
ज़रूर देखें
- काशी विश्वनाथ के साथ दर्शन
- दीपावली के बाद अन्नकूट उत्सव
- धनतेरस के आसपास स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन
यात्रा टिप्स
- उसी सुबह काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ इसे भी जोड़ लें।
- धनतेरस के आसपास स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन के समय बहुत लंबी लाइन होती है।
- गली तंग और भीड़ वाली है, इसलिए अपना सामान संभालकर रखें।
लोकेशन
विश्वनाथ गली, काशी विश्वनाथ के पास
आसपास की जगहें
मंदिरकाशी विश्वनाथ मंदिर
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से गंगा घाट तक सीधा और चौड़ा रास्ता है।
- समय: लगभग सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक (मंगला आरती से शुरू)
- प्रवेश: सामान्य दर्शन फ़्री; सुगम दर्शन और आरती के लिए टिकट
घाटदशाश्वमेध घाट
शाम की गंगा आरती के लिए सबसे मशहूर घाट। आरती से काफ़ी पहले पहुँचकर जगह ले लीजिए।
- समय: पूरे दिन खुला; गंगा आरती सर्दी (अक्टूबर–मार्च) में लगभग शाम 6 बजे और गर्मी में 6:45 बजे, लगभग 45 मिनट
- प्रवेश: फ़्री (नाव का किराया अलग)
मंदिरकाल भैरव मंदिर
काशी के कोतवाल। मान्यता है कि बनारस यात्रा इनके दर्शन के बिना अधूरी है।
- समय: लगभग सुबह 5 से दोपहर 1:30 और शाम 4:30 से रात 9:30
- प्रवेश: फ़्री